250 500
Download Bookhungama App

मेरी शायर से दो बाते -

Description:

एक शायर जो जिंदगियाँ ढालता हैं अपने लफ्जों में; नज़्मों-ग़ज़लों में। कभी कभार यु भी होता हैं के उसकी एक नज़्म हमारी खुद की जिंदगी का आइना बनके सामने आती हैं। ऐसे शायर से फिर एक बेनाम रिश्ता सा बन जाता हैं। ऐसे में अपनी जिंदगी के और कई अनगिनत पेहलुवो को भी शायर तक पहुँचाने की तमन्ना जाग उठती हैं। बातों, जज्बातों का दौर फिर ऐसे ही शुरू हो जाता है। मैंने भी मेरे शायर से रूबरू होने का बहाना ढूंढा और खतों का एक सिलसिला शुरू हुआ।  मेरे शायर से मैंने जो बातें कही हैं वो आज आपको पेश करने जा रही हूँ। गुलज़ार साब मेरे शायर हैं और मैं उनकी दीवानी। दीवानगी का ये एक नमूना अब आपके हवाले।



एक शायर जो जिंदगियाँ ढालता हैं अपने लफ्जों में; नज़्मों-ग़ज़लों में। कभी कभार यु भी होता हैं के उसकी एक नज़्म हमारी खुद की जिंदगी का आइना बनके सामने आती हैं। ऐसे शायर से फिर एक बेनाम रिश्ता सा बन जाता हैं। ऐसे में अपनी जिंदगी के और कई अनगिनत पेहलुवो को भी शायर तक पहुँचाने की तमन्ना जाग उठती हैं। बातों, जज्बातों का दौर फिर ऐसे ही शुरू हो जाता है। मैंने भी मेरे शायर से रूबरू होने का बहाना ढूंढा और खतों का एक सिलसिला शुरू हुआ।  मेरे शायर से मैंने जो बातें कही हैं वो आज आपको पेश करने जा रही हूँ। गुलज़ार साब मेरे शायर हैं और मैं उनकी दीवानी। दीवानगी का ये एक नमूना अब आपके हवाले।


Format:

Publisher: